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जानिए क्यूं हंसाता और रुलाता है प्याज? कीमत बढ़ने से गिर चुकीं हैं कई सरकारें

know why Onion prices fluctuate many Governments have fallen due to price rise

इन दिनों देश भर में प्याज (Onion) के दाम चरम पर है. आज के समय कुछ लोग तो प्याज को सोना जैसा मानते है. बता दें केंद्र सरकार (Central Government) ने प्याज के निर्यात पर बैन लगा दिया है और साथ ही खुदरा और थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक की लिमिट भी तय कर दी है. प्याज के चढ़ते दाम पर काबू पाने के लिए ऐसा किया गया है. देश में कहीं चुनाव (Election) नजदीक होते हैं तो प्याज की कीमतों में तेजी दिखाई देती है. आमतौर पर सरकार प्याज के निर्यात पर रोक लगाती है और कीमतें घटने पर खरीदने लगती है. हालांकि, यह सिर्फ शॉर्ट टर्म के लिए किए उठाए जाने वाले कदम हैं. ऐसे ही प्याज से जुड़े कई मुद्दे हैं जिन्हें जानना जरूरी है…


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जाने कितनी सरकारें गिरा चुका है प्याज

साल 1980 में प्याज चुनावी मुद्दा बन गया था. भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान प्याज के दाम का जमकर फायदा लिया. वहीं, साल 1998 में दिल्ली में प्याज के ज्यादा दाम भाजपा की सरकार के गिरने का प्रमुख कारण बने. राजस्थान में भी यह मुद्दा काफी गरम रहा. बता दें चीन के बाद सबसे ज्यादा प्याज का उत्पादन भारत में होता है, भारत प्याज का एक बड़ा निर्यातक भी है. कुल उत्पादन का 7 से 11 प्रतिशत प्याज निर्यात किया जाता है.


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साल 2010 के नवंबर महीने में नाशिक में कई इलाकों में अत्यधिक बारिश के कारण प्याज मंडियो में प्याज की सप्लाई में देरी हुई. तत्कालीन मनमोहन सरकार ने तुरंत फैसला लेते हुए निर्यात पर रोक लगाई, आयात शुल्क घटाया और पाकिस्तान से आयात किया. साल 2013 और 2015 में कई बार प्याज के दाम काफी ऊपर पहुंचे. दिल्ली में साल 2015 में खुदरा बाजार में प्याज 80 रुपये प्रति किलो के दाम पर बिक रहा था. उस समय सरकार ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आयात कर स्थिति पर काबू पाया था.


जानिये क्यों होता है प्याज के दाम में उतार-चढ़ाव…

दरअसल, देश में प्याज की 3 फसलें होती हैं, खरीफ, लेट खरीफ और रबी. ये तीनों सीजन्स में कुल मिलाकर 60 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादन होता है. जुलाई से सितंबर के बीच प्याज के दाम बढ़ जाते हैं और बाजार थोड़ा बहुत रबी सीजन के प्याज पर निर्भर हो जाता है. इसके अलावा, घरेलू बाजार में प्याज के दाम APMC टैक्स, कमीशन एजेंटों की फीस, एक्सपोर्ट ऑर्डर आदि पर भी निर्भर करते हैं.



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प्याज निर्यात पर रोक से किसान नाखुश…

आमतौर पर प्याज के निर्यात पर रोक लगने से किसान हतोत्साहित होते हैं. महाराष्ट्र के किसान स्टॉक लिमिट और एक्सपोर्ट बैन से खुश नहीं हैं. रिटेलर अब 100 क्विंटल तक और होलसेल डीलर 500 क्विंटल तक प्याज स्टोर कर सकेंगे. एक सप्ताह पहले सरकार ने प्याज का मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस बढ़ाया था ताकि इसके देश से बाहर जाने पर कुछ रोक लग सके. कन्ज्यूमर्स अफेयर्स डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि ‘मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस बढ़ाने पर भी कम MEP पर प्याज बांग्लादेश और श्रीलंका भेजने की रिपोर्ट्स मिली थीं. लिहाजा निर्यात पूरी तरह रोकने का निर्णय किया गया’. अब महाराष्ट्र देश में कुल करीब 2.35 करोड़ टन प्याज उत्पादन में 35 प्रतिशत योगदान देता है. वहां के किसान केंद्र सरकार के ताजा कदम से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं.


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