Crime Police & Forces

यूपी का एक पुलिसवाला, जिसकी संपत्ति 14 साल में हुई 1200 गुना, FIR दर्ज

Retired DSP Harshvardhan Bhadauria

उत्तर प्रदेश के नोएडा जिले से एक मामला सामने आया है. जहां नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे रिटायर्ड डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया के खिलाफ थाना सेक्टर-49 में आय के अधिक संपत्ति में एफआईआर दर्ज की गयी है. पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर की गई है. एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर अरविंद कुमार की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है. इसमें आय से 1178 प्रतिशत अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप लगाया गया है.


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पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार मूलरूप से इटावा निवासी हर्षवर्धन भदौरिया ने 30 मई, 1981 को यूपी पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर ज्वाइनिंग की थी. साल 2003 तक वह दूसरे जिलों में तैनात रहे और साल 2003 में ही नोएडा प्राधिकरण में तैनाती प्राप्त कर ली. इस दौरान तत्कालीन सरकार के दिग्गज नेता के संरक्षण में भदौरिया की साल 2003 से संपत्ति में अचानक बढ़ोतरी होती चली गई और फिर इन्हीं कारणों से चर्चा में आ गए. आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो को मिली, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई.


फाइल फोटो

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1 जनवरी, 2003 से 29 मई, 2017 तक भदौरिया की शुद्ध आय वेतन, भर्ती, एरियर की मिलाकर 8 लाख 32 हजार 324 रुपये. लेकिन इस बीच भदौरिया ने प्लॉट खरीदने आदि पर 10 करोड़ 63 लाख 76 हजार 352 रुपये खर्च किए. इससे सीधे 9 करोड़ 80 लाख 53 हजार 328 रुपये की संपत्ति अधिक पाई गई जो उनकी आय से 1178 प्रतिशत अधिक निकली. उनके खिलाफ कई बेनामी संपत्ति होने की भी आशंका ब्यूरो ने व्यक्त की है.


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जांच के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर सवाल किए गए, लेकिन हर्षवर्धन भदौरिया जवाब नहीं दे पाए. आला अधिकारियों के निर्देश पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कराने का निर्णय लिया गया. भ्रष्टाचार की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जिलेभर में उनको लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. उनके आलीशान कोठी से लेकर प्राधिकरण में तैनाती के दौरान धाक को लेकर भी लोग आपस में बात करते दिखे.


पूर्व डीएसपी भदौरिया की कोठी

वहीं, हर्षवर्धन भदौरिया ने कहा कि मेरे खिलाफ झूठी शिकायत पुलिस महानिदेशक से की गई थी. जांच में भ्रष्टाचार निवारण संगठन को मेरे खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला था तो मेरे आवास का मूल्यांकन मौजूदा रेट पर किया गया जो गलत है. मैं इस संबंध में न्यायालय की शरण लूंगा.


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