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देश को गोल्ड मेडल देने वाले पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी ने यूपी सरकार से लगाई मदद की गुहार, पलायन को भी तैयार

para badminton

कहते है मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों में उड़ान होती है. ये पंक्तियां यूपी की राजधानी लखनऊ में रहने वाले इन दो पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी अबु हुबैदा और शशांक के ऊपर एकदम सटीक बैठती है. लखनऊ शहर के अबु हुबैदा (24) (व्हीलचेयर-2) कैटगरी एवं शशांक (व्हीलचेयर-1) कैटगरी के ये दिव्यांग खिलाड़ियों का सपना है अपने भारत देश का नाम रोशन करने का. लेकिन इन खिलाडियों की जीतोड़ मेहनत पर यूपी सरकार ने पानी फेर दिया है. हर खिलाड़ी खेल में अपना शत् प्रतिशत देकर देश व दुनिया के साथ अपना भी नाम रोशन करना चाहता है. वो चाहता है कि उसको भी सम्मान व प्रोत्साहन मिले जिसका वो हकदार है. इससे उस खिलाड़ी का हौसला बढ़ जाता है. मगर इतनी मेहनत के बावजूद भी अगर उसको ये सम्मान व प्रोत्साहन न मिले तो उस खिलाड़ी के दिल पर क्या बीतती होगी, ये उससे बेहतर कौन जान सकता है. शायद ये सब कल्पना से परे व असहनीय दर्द जैसा लगता है.

 

 

जानिए कौन है ये पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी

आज हमारे Breaking Tube के पत्रकार से बात करते हुए- कहना नहीं खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी है, हां मुश्किलों से कह दो मेरा हौसला बड़ा है इन पंक्तियों के साथ 24 वर्षीय अबु हुबैदा ने बताया की वे (व्हीलचेयर-2) कैटगरी में बैडमिंटन खेलने वाले खिलाड़ी है. दूसरी तरफ, विकल्प मिलेंगे बहुत मार्ग भटकाने के लिए, संकल्प एक ही काफी है मंजिल तक जाने लिए इन पंक्तियों के साथ शशांक ने बताया कि वे (व्हीलचेयर-1) कैटगरी के बैडमिंटन खेलने वाले खिलाड़ी है. साल 2014 में शशांक और अबु हुबैदा बैडमिंटन में कदम रखा था. जिसके बाद इन्होंने साल 2015 में ओपन राष्ट्रीय चैंपियनशिप चेन्नई में गोल्ड मेडल जीता था. शशांक ने (व्हीलचेयर-1) कैटगरी बैडमिंटन में 2015 में डबल में सिल्वर मेडल जीता था. इसके बाद अच्छी परफॉमेंस में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साल 2018 में नेशनल चैंपियनशिप में 1 गोल्ड, 1 सिल्वर, 1 ब्रोंज मेडल जीता था. शशांक ने 2018 में सिंगल -डबल में दोनो में ब्रोंज व सिल्वर मेडल जीता है.

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सपना पूरा करने के लिए सीएम योगी से लगाई मदद की गुहार

पैरा बैडमिंटन के इन खिलाड़ी को मेडल जीतने के बाद भी खुद का सपना अधूरा लगने लगा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की सरकार किसी भी प्रकार से इन खिलाड़ियों का हौसला नही बढ़ा रही है. इन दोनों का एक ही सपना है, कि 2020 में होने वाले पैरा-ओलम्पिक मैच में विजय हासिल करके देश के लिए मेडल जीत कर देश का परचम बुलंद करने का. बातचीत के दौरान अबु हुबैदा ने बताया कि साल 2017 में इन्होंने 2 बार मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई थी. मगर, इनको आश्वासन के सिवा कुछ नही दिया जाता है. सरकार इन्हें आश्वासन देकर विदा कर देती है और इनकी मदद पर कोई प्रतिक्रिया अभी तक नही मिली है. परंतु अभी भी इन लोगों ने उम्मीद का दामन नही छोड़ा है और आज भी इनको सरकार से मदद की आस है.

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सरकारी मदद मिलने पर करेंगे पलायन

अबु हुबैदा और शशांक ने बताया है कि हमारे जैसे और भी खिलाड़ी है जो देश के लिए खेलना तो चाहते है, मगर सरकार की आंखो में मोटा पर्दा पड़ा हुआ है और उन्हें खिलाड़ियों का हौसला दिखाई नही दे रहा है. कई ऐसे खिलाड़ी है जो बैडमिंटन खेलना बंद कर दिए है किसी प्रकार के मैच में नही खेलना चाहते है क्योंकि सरकार इन पर ध्यान नही दे रही है. इनका कहना है अगर सरकार हमारी तरफ भी ध्यान नही देगी तो हम भी खेलना बंद कर देंगे सिर्फ बैडमिंटन कोर्ट ही दिखाई पड़ेगा मैदान में हम जैसे खिलाड़ी नहीं.

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