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अगर ऐसा हुआ तो 3 महीने के भीतर ही भारत लाया जा सकता है विजय माल्या

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने खुद को भारत प्रत्यर्पित करने के ब्रिटेन सरकार के आदेश के कुछ ही घंटों बाद सोमवार को कहा कि वह अपील की प्रक्रिया शुरू करेगा. ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जावीद ने माल्या को करारा झटका देते हुए उसे भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया है, जिसके बाद माल्या की यह प्रतिक्रिया आई है. माल्या के पास ब्रिटेन की हाई कोर्ट में अपील की इजाजत हासिल करने के लिए चार फरवरी से 14 दिनों का वक्त है. माल्या ने एक ट्वीट में कहा कि वह अपने प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ अपील की प्रक्रिया शुरू करेगा


ब्रिटिश गृह कार्यालय ने बताया कि धोखाधड़ी की साजिश रचने और धनशोधन के आरोपों में गृह मंत्री ने माल्या के प्रत्यर्पण के आदेश दिए हैं. इसे माल्या को वापस लाने के भारत के प्रयासों की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है. लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 10 दिसंबर 2018 को कहा था कि 63 साल के कारोबारी माल्या को भारतीय अदालतों के समक्ष जवाब देने होंगे. प्रत्यर्पण संधि की प्रक्रियाओं के तहत चीफ मजिस्ट्रेट का फैसला गृह मंत्री जावीद को भेजा गया था, क्योंकि सिर्फ गृह मंत्री ही माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश देने के लिए अधिकृत हैं.


अब माल्या के प्रत्यर्पण का मामला पूरी तरह से कोर्ट पर निर्भर है. बड़ा सवाल यह है कि क्या माल्या लोकसभा चुनाव तक यानी मई 2019 से पहले भारत लाया जा सकता है, इसका जवाब हां में है, लेकिन इसके लिए कुछ किंतु-परंतु हैं. आइए जानते हैं कि माल्या का जल्द प्रत्यर्पण किस सूरत में संभव है.


माल्या की अपील पर सबसे पहले एक जज वाले हाईकोर्ट की बेंच में सुनवाई होगी. यह जज भी यदि प्रत्यर्पण के आदेश पर मुहर लगाते हैं, लेकिन आगे अपील की अनुमति भी दे देते हैं तो उसके बाद माल्या की अपील पर हाईकोर्ट के दो जज सुनवाई करेंगे. इसके बाद माल्या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है कि उसके केस की सुनवाई वहां की जाए. अगर सुप्रीम कोर्ट यह मंजूर कर लेता है तो पूरे मामले की सुनवाई पूरी होने में करीब 18 महीने लग जाएंगे.


लेकिन यदि अपील के पहले चरण में ही हाईकोर्ट ने प्रत्यर्पण पर मुहर लगा दी और माल्या को आगे अपील की इजाजत नहीं दी, तो माल्या को जितनी जल्दी हो सके प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा सकेगा. तब इस बात की प्रबल संभावना होगी कि माल्या को मई, 2019 से पहले ही भारत लाया जाए.


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