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पाक स्कूलों में हिंदू छात्रों को जबरन पढ़ाई जा रही कुरान, किताबों में जिहाद को बताते है अच्छा, बच्चों में पैदा होती है धार्मिक नफरत

Quran being forcibly taught to Hindu Students in Pakistan schools tells Jihad is good in Books

पाकिस्तान (Pakistan) से लगातार हिंदुओं (Hindu) के लिए खराब होते हालात की खबरें आ रही हैं. पाक स्कूलों (Pak School) में शुरुआती कक्षा से लेकर इंटर तक जो पढ़ाया जाता है, वो दूसरे धर्मों के लिहाज से आपत्तिजनक होता है. खासकर इन किताबों में हिंदू विरोधी टिप्पणियां भी होती हैं. कई रिपोर्ट्स में इसके खिलाफ आवाज भी उठाई जा चुकी है. वहीं, हर महीने हिंदू लोग ईशनिंदा कानून का शिकार बनाए जाते हैं, उनके खिलाफ अपराध बढ़े हैं. हिंदुओं को सुरक्षा देने के नाम पर अवैध धन उगाही की जाती है. हैरानी की बात ये है कि पाकिस्तान की स्कूली किताबें हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों से भरी पड़ी हैं.


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आज से करीब 2 साल पहले पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली ने पूरे पाक स्कूलों में कुरान की पढ़ाई अनिवार्य कर दी. वहां के प्रमुख अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक दो साल पहले ‘होली कुरान बिल 2017’ को पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में पास किया गया. जिसके बाद पाकिस्तान के तमाम स्कूलों में उसकी पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई. इसकी पढ़ाई अब ग्रेड वन क्लास से लेकर ग्रेड 12 क्लास तक अनिवार्य है. हालांकि, जब ये बिल लागू हुआ तो ये कहा गया था कि ये अनिवार्यता केवल उन्हीं बच्चों पर लागू होगी, जो मुस्लिम होंगे. लेकिन पाकिस्तान से मिलने वाली कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कई स्कूलों में अल्पसंख्यक बच्चों को भी उन्हें इसकी पढ़ाई करना ज़रूरी है, अन्यथा उन्हें स्कूल में दाखिला नहीं मिलता.



हाल ही में सस्टनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट (SDPI) इस्लामाबाद द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के स्कूलों के पाठ्यक्रमों से ऐसा लगता है कि पाकिस्तान केवल मुस्लिमों का देश है, जहां अन्य किसी धर्म के लोग नहीं रहते. सभी के लिए कुरान पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है. हमारा संविधान कहता है कि कुरान को केवल मुस्लिम बच्चों के लिए अनिवार्य किया जाए. लेकिन स्कूलों ने सभी के लिए इसकी पढ़ाई जरूरी कर दी है. कानून के अनुसार क्लास 1 से लेकर 5 तक के स्टूडेंट्स कुरान के अरबी टेक्स्ट को पढ़ना सीखेंगे. जबकि क्लास 6 से 12 तक के बच्चे अरबी टैक्स्ट के साथ इसके आसान उर्दू ट्रांसलेशन को पढ़ेंगे.


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एसडीपीआई की रिपोर्ट ये भी कहती है कि इस पढ़ाई से अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत पैदा होगी. यही नहीं छात्रों को जो किताबें पढ़ाई जाती हैं, उसमें जिहाद और शहादत को काफी ज्यादा अच्छा बताया गया है. वैसे पाकिस्तान की स्कूली किताबों के पाठ्यक्रम में धार्मिक तौर पर विवादित सामग्री को लेकर पहले भी कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिसमें इस पर आपत्ति भी जाहिर की गई.


बता दें अमेरिकी कमीशन ‘यूएस कमीशन आन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ के चेयरमैन लेनार्ड लियो ने इस रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तान में हालात लगातार खराब हो रहे हैं. रिपोर्ट में पाकिस्तान के चारों प्रातों में कक्षा 1 से लेकर 10 तक की 100 से ज्यादा पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन किया गया. किताबों में लिखा है कि ‘हिंदुओं की संस्कृति और समाज अन्याय और क्रूरता पर आधारित है. जबकि इस्लाम शांति और भाईचारे का संदेश देता है’. देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले पंजाब प्रांत में कक्षा 4 की सामाजिक अध्ययन की किताबों में लिखा है कि ‘मुस्लिम विरोधी ताकतें दुनिया से इस्लाम के वर्चस्व को खत्म करने में लगी हैं’.


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वहीं, पाकिस्तान की इतिहास की किताबों में मोहम्मद गजनवी को नायक के तौर पर महिमामंडित किया गया है. जिसने 1029 ईस्वी के आसपास सोमनाथ मंदिर को तोड़ा था. इन्हीं सब शिक्षाओं का नतीजा है कि पाकिस्तान दुनिया का तीसरा सबसे असहिष्णु देश बन चुका है. ये रिपोर्ट अमेरिकी सरकार के एक मिशन ने तैयार की थी. रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की पढ़ाई में कट्टर इस्लाम के नाम पर जहर का बीज बोया जा रहा है. ये पढ़ाई अक्सर आतंकियों के प्रति सहानुभूति की वजह बनती है. ये शिक्षा धार्मिक अतिवाद को बढावा भी देती है, जो पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहा है.


कुछ समय पहले पाक अखबार डॉन में रिपोर्ट छपी थी कि पाकिस्तानी स्कूलों में हिंदुओं और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति विद्वेषपूर्ण और भडक़ाऊ शिक्षा दी जा रही है. रिपोर्ट कहती है कि टैक्स्ट बुक्स में कई आपत्तिजनक बातें दर्ज हैं. ज्यादातर टीचर गैर मुस्लिमों को इस्लाम का दुश्मन मानते हैं.



आपको बता दें पाकिस्तान में आमतौर पर हिंदू बच्चों को दाखिला नहीं मिल पाता है. प्रवासी भारतीयों को पाकिस्तान में तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है. पाकिस्तान में हिंदुओं के बलपूर्वक धर्म बदलवाने की घटनाएं बहुतायत में हैं. हिंदू लड़कियों के लिए पाकिस्तान में रहना मुश्किल होता जा रहा है, उनका अपहरण करके जबरदस्ती मुसलमानों से शादी करा दी जाती है. हिंदुओं और सिखों से जबरदस्ती जजिया टैक्स वसूला जाता है. हिंदू कर्मचारियों की हालत भी बहुत बेहतर नहीं है. स्कूलों की किताबों में पाठ्यक्रम ऐसा है जो हिंदुओं के प्रति विद्वेष ज्यादा फैलाता है. हिंदुओं से उनकी बड़े पैमाने पर जमीन छीनी जा चुकी है. हिंदुओं को ना तो अच्छी नौकरी मिल पाती है और ना ही बैंक से लोन मिल पाता है.


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इतना ही नहीं ईशनिंदा का शिकार बनाकर अक्सर हिंदुओं को नाहक ही फंसा दिया जाता है, जिसमें मृत्यु दंड जैसी कड़ी सजा का प्रावधान है. पाकिस्तान में हिंदुओं को अपने, परिवार और व्यवसाय की सुरक्षा के लिए फिरौती देनी होती है, जो स्थायीय असमाजिक तत्वों द्वारा वसूली जाती है, जिसमें स्थानीय नेताओं का भी दखल होता है. पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों से भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है. उनकी स्थिति दोयम दर्जे के नागरिकों से भी गई बीती है. कानून इस तरह बने हैं कि वो हमेशा मुसलमानों के लिए मददगार होते हैं.


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