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चीन में मुसलमानों पर जुल्म की इंतेहा, रोजा रखना और नमाज पढ़ना गुनाह, तोड़ी जा रही मस्जिदें

xi jinping orders to destroy mosques

मुसलमानों के लिए पाक माने जाने वाले रमजान का महीना शुरू होने पर जहां एक तरफ दुनिया भर के मुस्लिम रोजा रख रहे हैं, वहीं दूसरी चीन में रोजादारों से यह हक छीन लिया जाता है। यहां मुसलमानों पर रमजान में पाबंदियां और सख्त हो जाती है। मुस्लिम किसी भी तरह के धार्मिक काम या प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। चीन में इस तरह का प्रतिबंध खास तौर पर पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में है। यहां प्रशासन कड़ी नजर रखने के लिए सर्विलांस कैमरों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।


सरकारी आदेश नहीं मानने पर जेल

अंग्रेजी अखबार गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के शिनजियांग में मस्जिद और मदरसों को सरकारी फरमान के तहत तोड़ दिया गया है। मुसलमानों को एक जगह पर इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गयी है। नौकरी पेशा लोगों को रोजा रखने पर रोक है। इसके अलावा स्कूल-कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां भी रोजे नहीं रख सकते। सार्वजनिक स्थान पर नमाज नहीं पढ़ सकते। साथ ही जो लोग इस सरकारी फरमान को नहीं मानते, उन्हें पुलिस पकड़ कर जेल में डाल देती है।


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जेल में उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है, इसकी जानकारी उनके परिजनों को नहीं दी जाती। धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदी वाले आदेशों के खिलाफ कोर्ट में अपील या याचिका भी नहीं दायर की जा सकती। लेकिन माफी के प्रतिवेदिन दिया जा सकता है और वो सरकार पर निर्भर करता है कि माफी दी जाए या नहीं।


सैकड़ों साल पुरानी मस्जिद जमींदोज

रिपोर्ट के मुताबिक, उइगर मुसलमानों के लिए इमाम आसिम की दरगाह और दरगाह वाली मस्जिद महत्वपूर्ण तीर्थस्थल था। चीनी सरकार के हुक्म पर इस दरगाह और मस्जिद को तहस-नहस कर दिया गया। इस इलाके की सबसे बड़ी म कारगिलिक मस्जिद को भी चीनी सरकार ने बर्बाद कर दिया। होतन के नजदीक सैकड़ों साल पुरानी युतियन एतिका मस्जिद को हजारों लोगों के सामने सिर्फ इसलिए गिरा दिया गया, ताकि लोग वहां नमाज न पढ़ सकें।


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चीन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के उत्पीड़न और उनके दमन की कोशिश के लिए पूरी दुनिया में आलोचना झेल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 20 लाख उइगर, काजाख, किर्गिज और तुर्की मुस्लिमों को बीजिंग के डिटेंशन कैंप में बंदी बनाकर डाला हुआ है। इस कैंप में मुसलमानों का ब्रेन वाश करने के लिए सायकोलॉजिकल दबाव डाला जा रहा है।


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बता दें कि हाल ही में कुछ महिलाओं को रिहा गया था, जिन्‍होंने दावा किया कि कैद के दौरान उनसे ऐसे कृत्य कराए गए, जो इस्लाम में हराम हैं। उन्होंने बताया कि चीन के शिविरों में बंद रहने के दौरान उन्हें पोर्क खाने को मजबूर किया गया और शराब का सेवन करने पर मजबूर किया गया, जो इस्लाम में हराम है।


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