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Video: प्रियंका गांधी से पूछा सवाल तो कांग्रेस नेता ने पत्रकार से की हाथापाई, रिपोर्टर बीच-बचाव की लगाता रहा गुहार प्रियंका साधे रहीं चुप्पी

अक्सर ये देखा जाता है कि नेताओं से पत्रकार जब कोई तीखा सवाल पूछता तो इस स्थिति में जब कोई जवाब नहीं सूझता है तो वे पूछने वाले पर ही उंगली उठा देते हैं. ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में देखने को मिला जब एक पत्रकार ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से सवाल तो उनके सचिव ने गाली-गलौच के साथ जान से मारने की धमकियाँ देने लगें. यहां तक कि पत्रकार हाथापाई भी की. इस दौरान पत्रकार प्रियंका गाँधी (Priyanka Gandhi) से बीच-बचाव के लिए गुहार लगाता रहा लेकिन कांग्रेस महासचिव चुप्पी साधे रहीं.


दरअसल, प्रियंका गाँधी मंगलवार को सोनभद्र के उम्भा गाँव में नरसंहार पीड़ितों के परिजनों से मिलने पहुंची थीं. इसी दौरान एबीपी गंगा न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर नीतीश पांडे ने उनसे धारा 370 को लेकर कांग्रेस की राय जाननी चाही तो इसे सुनकर प्रियंका गाँधी के सचिव और राहुल गाँधी के सलाहकार संदीप सिंह ने रिपोर्टर पर हमला कर दिया. इतना ही नहीं, संदीप सिंह ने नीतेश पांडेय के जान से मारने धमकी दी और उन्हें अबशब्द भी कहे. साथ ही संदीप सिंह ने एबीपी गंगा के कैमरामैन को भी अपशब्द कहे. इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद प्रियंका गांधी वहां मौन खड़ी रहीं. प्रियंका के सामने ही संदीप सिंह पत्रकार के साथ गुंडई करता रहा, लेकिन प्रियंका गांधी ने संदीप सिंह को रोका तक नहीं और बिना कुछ बोले वहां से निकल गयीं.


प्रियंका गाँधी के सचिव ने रिपोर्टर से कहा, तुम्हें समझ नहीं आ रहा है. अभी ठोंक के यहीं बजा देंगे. मारेंगे तो गिर जाओगे. रिपोर्टर बार-बार बस इतनी ही बात कहता रहा कि प्रियंका जी देखिए आपके सामने धक्का मारा जा रहा है. प्रियंका के सामने ही धक्कामुक्की की गई. पर प्रियंका ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. हालांकि धारा 370 के सवाल पर उन्होंने ये जरूर कहा कि मैं यहां पीड़ितों से मिलने आई हूं.


इस घटना के बाद पत्रकार संघ में भी काफी रोष है। संघ के अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को इस घटना की जानकारी दी है. पत्रकार संघ ने संदीप सिंह के खिलाफ जान से मारने की धमकी का केस दर्ज कराने की मांग की है. पत्रकार संघ फिलहाल डीजीपी से मुलाकात भी करेगा.


अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नेताओं से पत्रकारों के सवाल ‘समोसे में लाल चटनी लेते हो या हरी’ जैसे सवाल होने चाहिए या वे उनके मीडिया प्रभारियों से मनभावन सवालों की सूची बनाकर प्रेस कांफ्रेस में जाया करें. सच तो यह है कि राजनेताओं की ऐसी सोच प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोटने जैसा है. दुःख इस बात का भी है कि तथाकथित पत्रकार संगठन भी कुछ टीवी स्टूडियो में बैठने वाले चुनिंदा लोगों की ही आवाज बनता है, जमीन पर काम करने वाले पत्रकार के मामलों में ये चुप्पी ही साधे रहते हैं.



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