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Mob Lynching: नाबालिग बेटी के अपहरण की आवाज उठाने पर पिता को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, साम्प्रदायिक तनाव

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Moradabad) से बेटी का अपहरण होने पर पुलिस में शिकायत करने पर दबंगों द्वारा पिता को पीट-पीटकर (Mob Lynching) मारने का मामला सामने आ रहा है. हत्या से खफा परिजन लगातार आक्रोश जता रहे हैं. ग्रामीणों द्वारा पुलिस के खिलाफ घंटों प्रदर्शन के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. मामला दो समुदायों का होने के कारण इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.


जानें पूरा मामला

यह पूरा मामला रामपुर के डिलारी थाना क्षेत्र के गांव आलियाबाद का है. जहां निवासी गंगाराम की नाबालिग बेटी का बीते दिनों अपहरण हो गया था. पड़ोसी मोहम्मद दानिश पर आरोप था कि उसने बेटी का अपहरण किया. पीड़ित पिता यह मामला बुधवार को पुलिस के पहुँच गया जिससे दानिश का परिवार भड़क गया. दानिश ने परिवार की भीड़ ने गंगाराम के घर में घुसकर उसकी लाठी-डंडों से उसकी जमकर पिटाई की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. परिजनों ने उसे मुरादाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां उपचार के दौरान गुरुवार को गंगाराम की मौत हो गई. पीड़ित अनुसूचित जाति का बताया जा रहा है.


गंगाराम के मौत की सूचना जैसे ही गांव वालों को लगी तो भड़क गए. आक्रोशित लोगों और हिन्दू संगठनों ने दूसरे समुदाय पर हत्या का आरोप लगाते हुए सड़क पर जाम लगा दिया. साथ ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. लोगों के आक्रोश को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी बुला ली गई. हिन्दुओ के प्रदर्शन के चलते आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है.


वहीं इस पूरे मामले पर सीओ मुरादाबाद (Moradabad)विशाल यादव ने बताया कि आरोपित दानिश सफायर हुसैन और छोटे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. हत्या के बाद गांव में दो वर्गों में तनाव उत्पन्न हो गया है. क्योंकि मामला दो समुदायों के बीच होने के कारण गांव में तनातनी का माहौल उत्पन्न हो गया है. जिसे देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. गांव में पुलिस के अलावा पीएसी भी तैनात कर दी गई है.


एसएसपी अमित पाठक ने भी माना है कि पूरे मामले में थानाध्यक्ष डिलारी दीपक कुमार ने अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं किया. नाबालिग लड़की के अपहरण की सूचना मिलने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया. पीड़ित घर तक जाकर जांच करना भी जरूरी नहीं समझा. एसओ ने अपने स्तर से लड़की की बरामदगी के भी कोई प्रयास नहीं किए. यदि एसओ ने मामले को संजीदगी से लिया होता तो नौबत गंगाराम की हत्या तक नहीं आती. ऐसो को निलंबित कर उसके खिलाफ जांच बिठा दी गई है.


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