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कुशीनगर मस्जिद ब्लास्ट: हैदराबाद से गिरफ्तार कैप्टन अशफाक ने सेना से 2 साल पहले ही ली है रिटायरमेंट, AMU से की है पढ़ाई

Kushinagar Mosque Blast all the accused arrested Salauddin caught from Bihar

यूपी के कुशीनगर (Kushinagar) में मस्जिद में विस्फोट (Masjid Blast) मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड हाजी कुतुबुद्दीन (Haji Qutubuddin) को गोरखपुर से तथा उसके पोते अशफाक (Ashfaq) को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है. विस्फोटक को मस्जिद तक पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अशफाक को पूरी साजिश का प्रमुख सूत्रधार बताया जा रहा है. विस्फोट के बाद वह घटनास्थल पर ही मौजूद था. इससे पहले मौलाना समेत 4 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. यूपी एटीएस द्वारा हैदराबाद से गिरफ्तार अशफाक सेना में कैप्टन रह चुका है. जानकारी के अनुसार डॉ अशफाक हैदराबाद के सेना अस्पताल में कैप्टन था और दो साल पहले ही उसने समयपूर्व सेवानिवृत्ति ले ली. वहीं उसकी पत्नी इस समय सेना अस्पताल में कार्यरत है.


AMU से की है मेडिकल की पढ़ाई

पता चला है कि अशरफ ने अलीगढ़ यूनवर्सिटी से एमबीबीएस किया इसके बाद वह आर्मी मेडिकल कोर में चयनित हुआ. उसने सेना अस्पताल में कैप्टन के तौर पर सेवाएं दीं. इस दौरान उसका एक महिला डॉक्टर से प्रेम हुआ, जो तेलंगाना के जगतियाल जिले की रहने वाली है. दोनों ने शादी कर ली. उसकी पत्नी भी हैदराबाद के लंगर हौज इलाके में सेना अस्पताल में डॉक्टर है. दो साल पहले अशफाक में समय पूर्व सेवानिवृत्ति ले ली और सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी करने लगा. पिछले साल वह यूपीएससी के इंटरव्यू में शामिल हुआ.


ब्लास्ट के समय घटनास्थल पर ही था अशफाक

विस्फोट के बाद अशफाक घटनास्थल पर ही मौजूद था. एक प्रशासनिक अधिकारी ने पूरे मामले में उसकी भूमिका पर संदेह जताते हुए उसे गिरफ्तार करने का इशारा भी किया लेकिन खुद को सेना का मेजर बताने और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने से पुलिस वाले उसके अर्दब में आकर फंस गए. जिसका लाभ उठाकर वह भाग निकलने में सफल हो गया. एटीएस की जांच-पड़ताल में पूरे मामले में उसकी प्रमुख भूमिका होने का पता चला है.


फर्रराटेदार अंग्रजी बोल, खुद को मेजर बता पुलिस को किया गुमराह

मस्जिद में विस्फोट के बाद पुलिस जब मौके पर पहुंची तो अशफाक मौके पर मौजूद मिला. पुलिस वालों के पहुंचते ही खुद को सेना का मेजर बताते हुए उसने उन्हें आदेश-निर्देश देना शुरू कर दिया. हद तो यह हो गई प्रथमदृष्टया उसकी भूमिका पर संदेह होने के बाद भी स्थानीय पुलिस उसकी हर बात एस सर, नो सर से अधिक कुछ बोल ही नहीं पा रही थी. इतना ही पुलिस अधिकारी भी उससे प्रभावित होकर सामान्य पूछताछ करने का भी साहस नहीं जुटा पाए. हालांकि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने अशफाक की आईडी मांगी तो वह दिखाने की बजाय उनसे बहस करने लगा.


झूठ पकड़ने जाने पर हुआ फरार

प्रशासनिक अधिकारी ने उसकी शैली को अनुचित बताते हुए फटकार लगाई तो उसने स्वीकार किया कि वह 2017 में ही सेवानिवृत्त हो गया था. उसने अपनी आइडी हैदराबाद के आर्मी अस्पताल में जमा होने का दावा किया. प्रशासनिक अधिकारी की सख्ती देख अशफाक इसके बाद मौका देखकर वहां से गायब हो गया. पूरे प्रकरण में फौरी तौर पर जिले की पुलिस टीम की लापरवाही सामने आई है. यदि पुलिस ने मामले की गंभीरता समझी होती तो घटना के तत्काल बाद ही अशफाक उसकी गिरफ्त में होता.


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