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यूपी: Fake Calls से परेशान 108 एम्बुलेंस सेवा, किसी की नहीं हो रही शादी तो किसी के पति है शराब के आदी…

108 Ambulance Service of Uttar Pradesh upset with Fake Calls

इन दिनों उत्तर प्रदेश की सरकारी एम्बुलेंस (Government Ambulance) का हाल बेहाल हुआ जा रहा है. गंभीर मरीजों और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए प्रदेश में 108 एवं 102 एम्बुलेंस सेवा चल रही है. यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के आशियाना में जीवीकेईएमआरआई संस्था (GVKEMRI Institution) एम्बुलेंस का संचालन कर रही है. इस दौरान कॉल सेंटर में रोजाना 108 एम्बुलेंस (108 Ambulance) के लिए 40 से 45 हजार फोन आते हैं. जिसमें करीब 30 से 32 हजार फर्जी के फोन आ रहे हैं. 102 एम्बुलेंस के लिए 50 हजार फोन आ रहे हैं, इनमें से 20 से 25 हजार फोन ही जरूरतमंद के होते हैं.


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दरअसल, 108 की प्रदेश में 2200 एम्बुलेंस हैं और लखनऊ में इनकी संख्या 44 है. कॉल सेंटर में एक वक्त पर 175 कर्मचारी फोन सुनते हैं. वहीं, 102 की 2270 तथा लखनऊ में 34 एम्बुलेंस है. कॉल सेंटर में एक समय पर 275 कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं. साथ ही 250 एएलएस एम्बुलेंस का संचालन हो रहा है.


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कुछ ऐसे केस जिनसे परेशान है 108 एम्बुलेंस

  1. शाहजहांपुर जिले की संतोषी वाजपेई का कहना है कि मेरे पति शराब के आदी हैं, डॉक्टरों को दिखाया, झाड़-फूंक भी कराई. लेकिन वह शराब छोड़ नहीं रहे हैं. आप ही कोई दवा बताएं ताकि शराब की यह लत छूट जाए.
  2. लखनऊ जिले के संतोष पोरवाल का कहना है मुझे रातों में नींद नहीं आ रही है… बताओ मैं क्या करूं. इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि रात में 03:00 बजे मैं आपको फोन कर रहा हूं.
  3. बलिया जिले के भूरे लाल ने कॉल करके कहा, हैलो 108 एम्बुलेंस सेवा से बोल रहे हैं…मेरी शादी नहीं हो रही है, विज्ञापन दे चुका हूं, वेबसाइट पर खोजबीन जारी है. यदि आप थोड़ी मदद कर देंगे तो मेरा घर बस जाएगा. इस पर 108 कॉल सेंटर का कर्मचारी फोन पर जवाब देता है… देखिए यह एम्बुलेंस सेवा का कॉल सेंटर है, यहां सिर्फ एम्बुलेंस मिलती हैं, शादी-ब्याह नहीं कराए जाते. आपने गलत नम्बर डायल किया है, यह कहकर कर्मचारी फोन काट देता हैं.

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इस संस्था के राज्य प्रमुख धनंजय कुमार बताते हैं कि इमरजेंसी में घर या सड़क से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. रेफर की दशा में मरीज को एक सरकारी अस्पताल से दूसरे में भी शिफ्ट करने में एम्बुलेंस मदद कर रही है. उन्होंने बताया कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में फोन करने के 15 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंचाई जा रही है. पर, गैरजरूरी फोन कॉल ने मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, पुरुष ही नहीं महिलाएं भी बेवजह फोन कर रही हैं.


मीडिया सलाहकार आनंद दीक्षित के अनुसार बेवजह फोन कर कुछ लोगों ने इरमजेंसी सेवा का मजाक बना रखा है. बिना जरूरत फोन कर एम्बुलेंस बुला लेते हैं. समय पर एम्बुलेंस के पहुंचने में अड़चन आ रही है.


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सीएमओ के डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं पर बेवजह फोन न करें. गैरजरूरी फोन कॉल से जरूरतमंद इमरजेंसी सेवा से महरूम हो सकते हैं. इससे मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है.


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