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बुलंदशहर हिंसा: जमानत पर जेल से छूटे आरोपियों का माला पहनाकर स्वागत, जय श्री राम के लगे नारे

उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर (bulandshahr) के स्याना में हुई हिंसा ( violence) के आरोपी जीतू फौज़ी समेत सात आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आ गए हैं. जेल से बाहर आने पर लोगों ने फूल माला पहनाकर राजद्रोह, हत्या और बलवा के आरोपियों का स्वागत किया गया है. साथ ही उस समय जय श्रीराम के नारे भी लगाए गए. आरोपियों के स्वागत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. 03 दिसंबर 2018 को स्याना के चिगरावठी में गोकशी के बाद हिंसा भड़क उठी थी. हिंसा के दौरान यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर और एक ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जेल में बंद सातों आरोपियों को हाल ही में हाइकोर्ट से जमानत मिली है. ​


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मीडिया रिपोट्स के मुताबिक बुलंदशहर हिंसा के आरोपी जीतू फौजी, शिखर अग्रवाल, हेमू, उपेंद्र सिंह राघव, सौरव और रोहित राघव जैसे ही शनिवार को कोर्ट से जमानत लेकर जेल से बाहर आए, तो हिन्दूवादी संगठन से जुड़े लोगों ने फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया. इस दौरान भारत माता की जय, वन्दे मातरम और जय श्री राम के नारे लगे. इस दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो किसी ने बना लिया. ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.



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इससे पहले स्याना में 3 दिसंबर 2018 को भड़की हिंसा के मामले में रविवार को सात आरोपी जेल से बाहर आ गए. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू फौजी समेत सात आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे. हत्या और बवाल के आरोप में सात आरोपियों की पहले ही जमानत हो चुकी थी, लेकिन धारा 24ए राजद्रोह का संज्ञान लेने के बाद आरोपियों की रिहाई रूक गई थी. प्रयागराज हाईकोर्ट ने अब देशद्रोह की धारा में सातों आरोपियों को जमानत दे दी है.


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इंस्पेक्टर की हो गयी थी हत्या

बता दें कि बुलंदशहर में उस वक्त हिंसा भड़क गई थी जब कुछ लोगों को गोवंश के टुकड़े गांव में मिले थे. इसके बाद गुस्साए 400 लोगों ने जमकर हंगामा किया. कई वाहनों को आग लगा दी गई और पुलिस पर पत्थर और कथित तौर पर गोलियां चलाईं. इस घटना में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह (inspector subodh kumar) के अलावा और एक अन्य युवक की मौत हो गई थी. चौधरी ने यह भी बताया कि इंस्पेक्टर ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी, जिसमें सुमित नाम के युवक की मौत हो गई थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन करते हुए इस मामले के जांच के आदेश दिए थे. जिसमें 5 लोगों पर इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या का आरोप लगा था साथ ही 33 लोगों पर हिंसा और आगजनी उकसाने के आरोप लगाए थे. जिनमें शिखर अग्रवार और उपेंद्र राघव का नाम शामिल है. 


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