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पुलिस के हत्थे चढ़ा बाहुबली मुख्तार अंसारी गिरोह का शार्प शूटर, 50 हजार का था इनामी

बाहुबली पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) गिरोह के शूटर 50 हजार रुपये के इनामी बृजेश सोनकर (Brajesh Sonkar) को मऊ पुलिस और क्राइम ब्रांच प्रयागराज की टीम ने दबोच लिया. सोनकर की गिरफ्तारी के बाद मऊ पुलिस अपने साथ ले गई. जानकारी के मुताबिक प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड के बाद मऊ पुलिस ने उसपर 50 हजार का इनाम घोषित किया था. फिलहाल पुलिस की टीम उससे पूछताछ में जुटी है.


प्रयागराज पुलिस के अनुसार मऊ पुलिस को पुख्ता खबर मिली थी कि मुख्तार गैंग का शर्प शूटर बृजेश सोनकर शुक्रवार को एमपी-एमएलए कोर्ट जा रहा है. बृजेश को पकड़ने के लिए कोपागंज थाना प्रभारी एक टीम के साथ बृजेश के पीछे लगे थे, लेकिन वह चकमा देकर भागने में सफल रहा. इधर सुबह ही कोपागंज थानेदार टीम के साथ प्रयागराज आ गये थे और वह सीधे क्राइम ब्रांच से मदद मांगने पहुंचने और पूरी जानकारी उपलब्ध कराई. क्राइम ब्रांच की मदद से कचहरी के आस पास पुलिस पहरा बैठाया गया और सादी वार्दी में तेज तर्रार दरोगा निगारानी करने लगे. इस बीच कटरा रोड पर एक सफेद स्कार्पियों देखी गयी, पता चला कि बृजेश उसी से कोर्ट आया है. पुलिस टीमों को अलर्ट किया गया और जब बृजेश निकला तो उसका पीछा शुरू किया गया. सर्कुलर रोड पर पुलिस ने बृजेश को घेर कर रोक लिया और गिफ्तार कर कैंट थाने ले गयी. जहां पूछताछ के बाद बृजेश सोनकर को मऊ पुलिस अपने साथ ले गयी.


दर्जनों मुकदमें हैं दर्ज

शूटर बृजेश पर दर्जनों की संख्या में मुकदमे दर्ज हैं. इनमें कई मुकदमों में वह मुख्तार अंसारी के साथ सह अभियुक्त भी है. सह अभियुक्त वाले मुकदमें की सुनवाई एमपी एमएलए कोर्ट में चल रही है और कोर्ट ने सभी मुकदमों में सख्त रूख अपनाया हुआ है. सुनवाई पर हाजिर न होने वालों की संपति कुर्क की जा रही है, जिसके डर से बृजेश प्रयागराज पेशी के लिये आया था. लेकिन, पुलिस ने दबोच लिया. हालांकि मुख्तार अंसारी पहले से ही बांदा जिला कारागार में बंद है और उसके भी सभी केस प्रयागराज एमपीएमएल कोर्ट में चल रहे हैं.


कौन है मुख्तार अंसारी ?

मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में ही हुआ था. 1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में मुख्तार का नाम आया था. हालांकि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई. लेकिन इस बात को लेकर वह चर्चाओं में आ गया. 1990 का दशक में मुख्तार अंसारी जमीनी कारोबार और ठेकों की वजह से अपराध की दुनिया में कदम रख चुका था. पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर में उनके नाम का सिक्का चलने लगा था.


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