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देश के प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका

बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) ने देश के प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) खोलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल किया है. उपाध्याय के मुताबिक इससे केवल गरीब बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा ही नहीं मिलेगी बल्कि देश की एकता और अखंडता भी मजबूत होगी.


शुक्रवार को दाखिल जनहित याचिका में उपाध्याय ने कहा है कि देश में कुल 5464 तहसील हैं लेकिन केंद्रीय विद्यालय मात्र 1209 हैं. इसलिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलना चाहिए. इससे गरीब बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिलेगी, उन्हें समान अवसर मिलेगा, आपसी भाईचारा बढ़ेगा तथा देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी”.


गरीब बच्चों को मिलेगी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा

अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि गरीबी के चलते किसान-मजदूर के होनहार बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा नहीं मिल पाती है. प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से उच्च कोटि की शिक्षा गरीब छात्रों तक पहुंचेगी जो अभीतक इससे वंचित हैं.


तहसील पर अधिकारी साथ रख सकेंगे परिवार

उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा कि तहसील में रहने वाले तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, कोतवाल, थानेदार, बिजली विभाग के अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अभियंता, लेक्चरर, प्रोफेसर और सरकारी डॉक्टर अपना परिवार साथ नहीं रखते क्योंकि तहसील मुख्यालय पर उनके बच्चों के लिए अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा व्यवस्था नहीं होती है. प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से उक्त सभी लोग अपना परिवार अपने साथ रख सकेंगे. ऐसे में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रोजाना लंबी यात्रा नहीं करेंगे और छुट्टियों पर नहीं जाएंगे जिसका सीधा फायदा यह होगा कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जरुरतमंद लोगों को हर समय उपलब्ध रहेंगे और इससे प्रशासनिक कार्य अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा.


प्रतिस्पर्धा से बढ़ेगी शिक्षा में गुणवत्ता

उपाध्याय ने याचिका में कहा कि प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने पर राज्य के सरकारी स्कूल भी इनसे प्रतिस्पर्धा करने लगेंगे फलस्वरूप शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा.


मिश्रित सभ्यता विकसित होगी

उपाध्याय ने याचिका में लिखा है कि केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर होता है और नियुक्ति भी देश के किसी भी राज्य में हो सकती है. भारत में हर राज्य की अपनी-अपनी सांस्कृतिक विरासत है, प्रत्येक तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने से कल्चरल मिक्सिंग होगी, जिससे एक मिश्रित सभ्यता का विकास होगा जो तमाम विविधताओं के बावजूद हमें एक सूत्र में बांधने का काम करेगा.


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