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आजमगढ़: निरहुआ की एंट्री ने बिगाड़ा जातीय समीकरण, अगर ऐसा हुआ तो सपा से फिसल सकती है सीट

उत्तर प्रदेश में सात चरणों में हो रहे चुनाव में पांच चरण का मतदान हो चुका है. अब सिर्फ दो चरण बाकी हैं. छठे चरण में 14 सीटों के लिए और 19 मई को सातवें चरण के लिए 13 सीटों पर मतदान होगा. अंतिम दो चरण के मतदान पूरी तरह पूर्वांचल पर केंद्रित हैं.


आजमगढ़ से इस बार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी ने उनके खिलाफ राजनीति के नए सितारे भोजपूरी फिल्मों के हीरो दिनेश लाल निरहुआ को उतारा है. इस संसदीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा यादव मतदाता है. इसे देखते हुए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस सीट को चुनाव लड़ने के लिए चुना है. इस सीट से उनके पिता और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी 2014 में चुनाव लड़कर जीत चुके हैं. इस बार चुनाव में बसपा का भी साथ मिलने से दलितों वोटरों के बल पर सपा अपनी जीत तय मानकर चल रही है.


अगर परिस्थितियों पर गौर करें तो अभी तक वह दलित मतदाताओं को पूरी तरह से अपने पक्ष में मतदान के लिए तैयार नहीं कर पाई है. वहीं भाजपा ने भी बसपा के सपा से गठबंधन के बाद दलित वोटरों को लुभाने का कार्य शुरू कर दिया है. भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ की छवि को भुनाने और यादव वोटों में सेंधमारी के प्रयास में बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है.


अपनी छवि के कारण दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ अपनी बिरादरी के साथ ही दलित वोटरों में भी ज्यादा सेंधमारी करते हुए दिखाई दे रहे हैं. अगर यही स्थिति कायम रही तो दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी.


निरहुआ’ का दावा है कि उन्हें आजमगढ़ में इस बार यादव सहित सभी वर्गों का समर्थन मिलेगा और उनकी उम्मीदवारी ने यहां अखिलेश यादव के सभी समीकरणों पर पानी फेर दिया है. उन्होंने कहा, ‘मेरे आने से अखिलेश जी के सारे समीकरण बिगड़ गए हैं. मेरे साथ समाज का हर वर्ग है. मैं यहां वंशवाद और जतिवाद की राजनीति खत्म करने आया हूं. अब आजमगढ़ में विकास की राजनीति होगी.’


दूसरी तरफ, सपा का कहना है कि आजमगढ़ में ‘निरहुआ’ को जनता गंभीरता से नहीं ले रही और भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार घोषित कर, यहां समर्पण कर दिया. आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा सीट से विधायक और सपा नेता संग्राम यादव ने कहा, ”आजमगढ़ के लोग भाजपा उम्मीदवार को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. सभी वर्गों के लोग अखिलेश के साथ हैं.


जानकारों के मुताबिक, इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख मतदाताओं में से साढ़े तीन लाख से अधिक यादव, तीन लाख से ज्यादा मुसलमान और करीब तीन लाख दलित हैं. बता दें कि
आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें से आजमगढ़ सदर, गोपालपुर और मेहनगर पर सपा का कब्जा है तो सगड़ी और मुबारकपुर बसपा के पास हैं. गौरतलब है कि आजमगढ़ लोकसभा सीट पर 12 मई को मतदान होना है.


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