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‘इनर लाइन परमिट’ को बीजेपी नेता ने दी SC में चुनौती, अपने ही देश में वीजा लेने जैसा है यह कानून

देश के किसी भी हिस्से में आने-जाने, बसने और आजीविका कमाने का अधिकार हमारे संविधान में दिया गया है. मगर, नागालैंड में नगा हिल्स क्षेत्र में जाने के लिए नगा मूल निवासियों के अलावा देश के अन्य सभी नागरिकों को इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit) यानी आईएलपी लेना पड़ता है. इस नियम को मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताते हुए बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.


मालूम हो कि नागालैंड में नगा हिल्स क्षेत्र में जाने के लिए नगा मूल निवासियो के अलावा सभी को आइएलपी लेना पड़ता है. इतना ही नहीं दीमापुर जिले को भी नगाहिल्स क्षेत्र में शामिल करके वहां भी आइएलपी लागू करने का प्रस्ताव है.


याचिका मे आइएलपी का प्रावधान करने वाले बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873 की धारा 2,3 और 4 को रद्द करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 2 जुलाई को सुनवाई करेगा. याचिका मे कहा गया है कि आइएलपी व्यवस्था एक प्रकार से अपने ही देश में वीजा सिस्टम की तरह है जो कि न सिर्फ अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव की मनाही), 19 (स्वतंत्रता) और 21 (जीवन) के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि उस क्षेत्र के विकास, समग्र निवेश को भी नुकसान पहुंचाता है और लोगों में आपसी विश्वास नहीं बनने देता.


इसके साथ ही इस सिस्टम की वजह से उस क्षेत्र के विकास, समग्र निवेश को भी नुकसान पहुंचाता है और लोगों में आपसी विश्वास भी नहीं पनपता है. अश्वनी उपाध्याय ने याचिका दाखिल करने का कारण बताते हुए कहा है कि वह 30 मार्च को परिवार के साथ गुवाहाटी, दीमापुर व कोहिमा घूमने गए थे. मगर, उन्हें गुवाहाटी से वापस आना पड़ा क्योंकि कोहिमा जाने के लिए आईएलपी चाहिए था, जो उनके पास नहीं था. उपाध्यान ने कहा कि उन्हें यह जानकर भी आश्चर्य हुआ की सरकार दीमापुर जिले में भी आईएलपी लागू करने की तैयारी कर रही है, जो महानगरीय शहर है. उन्होने बताया कि आईएलपी सिस्टम बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873 के प्रावधानों के तहत जारी होता है.


इसलिए अंग्रेजों ने बनाया था कानून

उपाध्याय ने कहा कि अंग्रेजों ने यह कानून इसलिए बनाया था, ताकि भारतीयों को नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली औषधि और अन्य बहुमूल्य वनस्पतियों के लाभ से वंचित किया जा सके. दरअसल, इस कानून के जरिये अंग्रेज वहां पर पाए जाने वाले उत्पादों का व्यापारिक लाभ उठाने और व्यापार में एकाधिकार कायम रखना चाहते थे. मगर, यह कानून आज भी बदस्तूर जारी है.


पहले कश्मीर में भी था लागू

उपाध्याय ने बताया कि पहले कश्मीर में भी यह कानूल लागू था और इसी के विरोध में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था. इसके बाद वह बिना परमिट कश्मीर गए थे जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और हिरासत में ही संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद कश्मीर से आईएलपी को हटाया गया था.


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