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अखिलेश बोले- 2022 में सपा करेगी वापसी, डिप्टी सीएम का पलटवार- अगले 50 साल तक UP और केंद्र में रहेगी BJP सरकार, न देखें सपना

उत्तर प्रदेश में उपचुनाव को लेकर सियासी माहौल बन चुका है. जिसके मद्देनजर सियासी बयानबाजी तेज हो गयी है. पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने 2022 में सरकार बनाने का दावा किया तो बीजेपी की तरफ से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Prasad Maurya) ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अगले 50 साल तक UP और केंद्र में BJP सरकार रहेगी. इसलिए अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने का सपना न देखें. दरअसल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सोमवार को प्रयागराज के दौरे पर थे. रामलीला मंचन के सभी पात्रों से मुलाकात कर उन्हें माला पहनाकर उनका स्वागत अभिवादन किया. इसी दौरान पत्रकारों के सावलों का जवाब देते हुए केशव मौर्य ने ये बातें कहीं.


केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) द्वारा साल 2022 में सरकार बनाने की बात पर कहा कि अगले 50 वर्षों तक उत्तर प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार रहेंगी. बीजेपी (BJP) की सरकार को 50 साल तक यूपी और केंद्र से कोई नहीं हटा सकता है. मौर्य ने कहा कि बीजेपी की सरकार गरीब, किसान और कमजोर तबकों की सरकार है. इसका एक ही उदेश्य है गरीबी हटाना, जनता का विकास करना और देश को शक्तिशाली बनाना. ऐसे में सपा अध्यक्ष को 50 साल बाद ही सरकार बनाने के बारे में सोचना चाहिए.


बता दें कि इससे पहले रविवार (6 अक्टूबर) को अखिलेश ने कहा था कि सपा परिवार आगे बढ़ रहा है. 2022 में हम मिलकर लड़ेंगे और 2022 में राज्य में सरकार बनाएंगे.  उन्होंने आगे कहा कि दूसरी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी सपा में शामिल होने की इच्छा प्रकट की है.


11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव

बता दें कि यूपी में 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. इनमें रामपुर, सहारनपुर की गंगोह, फिरोजाबाद की टूंडला, अलीगढ़ की इगलास, लखनऊ कैंट, बाराबंकी की जैदपुर, चित्रकूट की मानिकपुर, बहराइच की बलहा, प्रतापगढ़, हमीरपुर और अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट शामिल है. इन 11 विधानसभा सीटों में से रामपुर की सीट सपा और जलालपुर की सीट बसपा के पास थी और बाकी सीटों पर बीजेपी का कब्जा था.


इसलिए खास है ये उपचुनाव

उत्तर प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि सभी सियासी पार्टियां उपचुनाव में जोर-आजमाइश करेंगी. सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी की बात हो या समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी या कांग्रेस, इस बार सभी दल उपचुनाव में उतर रहे हैं. सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए जहां इस उपचुनाव में अपनी सीटें बचाने की चुनौती है, वहीं विपक्षी दलों के लिए यह साख बचाने की चुनौती वाला चुनाव कहा जा रहा है.


वैसे आम तौर पर विधानसभा उपचुनाव को सत्तारूढ़ दल का चुनाव माना जाता है. लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद पहली बार सभी सियासी पार्टियां अलग-अलग होकर अपना चुनाव लड़ रही हैं. यह चुनाव इसलिए भी और ज्यादा खास हो जाता है, क्योंकि सभी सियासी पार्टियों को अपने बेस वोट के साथ-साथ अपनी विचारधारा पर वोट मांगने का मौका मिलेगा.


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