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मोदी-जिनपिंग ने जिस विशालकाय ‘गेंद’ के आगे खिंचाया फोटो उसे 1200 से कोई नहीं हिला पाया, हैरान कर देगी ये कहानी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) शुक्रवार को अनौपचारिक भारत-चीन शिखर सम्मेलन के लिए दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे. तमिलनाडु के चेन्नई एयरपोर्ट पर उतरते ही उनका भव्य स्वागत शुरू हो गया. वे चेन्नई से महाबलीपुरम पहुंचे, जहां पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी पारंपरिक तमिल परिधान ‘विष्टी’ (सफेद धोती), आधी बांह की सफेद कमीज के साथ ही गमछा कंधे पर रखे नजर आए. वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सफेद शर्ट और काली पतलून पहने दिखे.


पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को चेन्नई से करीब 50 किलोमीटर दूर पुरातनकालीन तटीय शहर महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में एतिहासिक जगहों पर ले गए. यहां ‘कृष्ण का माखन लड्डू’ (Krishna Butterball) के पास लेकर गए. ‘कृष्ण का माखन लड्डू’ एक विशाल पत्थर है, जिसकी ऊंचाई 6 मीटर और चौड़ाई करीब 5 मीटर है. इसका वजन 250 टन है. इसी अनोखे गोल पत्थर को कृष्ण के माखन के गोले के नाम से भी जाना जाता है. यहां पर पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने तस्वीर भी खिंचाई.


ये है कहानी

यह रहस्यमयी पत्थर करीब 20 फीट ऊंचा और करीब 15 फीट चौड़ा है. यह पत्थर एक ढलान पर आश्चर्यजनक रूप से टिका हुआ है, जो न तो कभी हिलता है और ना ही कभी लुढ़कता है. महाबलिपुरम आने वाले लोग 250 टन वजनी इस पत्थर को देखकर हैरान रह जाते हैं कि आखिर यह कैसा चमत्कार है. कुछ लोग इस पत्थर को श्रीकृष्ण के माखन की गेंद भी कहते हैं.


मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में इस जगह पर थोड़ा सा माखन गिरा दिया था, जो अब एक विशाल पत्थर का रूप ले चुका है. इस पत्थर को पहली बार साल 1908 में खोजा गया था. कहते हैं कि एक बार इस पत्थर को नीचे लाने के लिए सात हाथियों द्वारा बांधकर खिंचवाया गया था, लेकिन यह पत्थर अपनी जगह से हिला तक नहीं. यह पत्थर किसी इंसान द्वारा इस जगह पर खड़ा किया गया है या प्रकृति के द्वारा, इस सवाल का सटीक जवाब आज तक किसी को नहीं मिल पाया है. पत्थर का रहस्य अभी भी बना हुआ है.


पंच रथ और शोर मंदिर भी गए शी जिनपिंग

महाबलीपुरम में पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अर्जुन तपस्या स्थल के अलावा पंच रथ और शोर मंदिर घुमाया. पंच रथ को ठोस चट्टानों को काटकर बनाया गया है. ये सभी अंखड मंदिर के रूप में मुक्त तौर पर खड़े किए गए हैं. पंच रथ के बीच में एक विशाल हाथी और शेर की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.


चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर पीएम मोदी शोर मंदिर पहुंचे. यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल है. माना जाता है कि शोर मंदिर सात मंदिरों या सात पैगोडा का हिस्सा है और उनमें से छह समुद्र के नीचे डूबे हुए थे. पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने शोर मंदिर के पास कलाक्षेत्र फाउंडेशन के छात्रों की ओर से आयोजित किए गए लोकनृत्य का भी आनंद लिया.


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