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सलमान खुर्शीद बोले- पार्टी को शून्य में छोड़कर चले गए राहुल, चुनाव जीतना तो दूर कांग्रेस अपना भविष्य तक तय नहीं कर सकती

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद (Salman khurshid) ने कांग्रेस के मौजूदा हाल पर बड़ा बयान दिया है. सलमान खुर्शीद ने कहा है कि पार्टी संघर्ष के दौर से गुजर रही है. हरियाणा और महाराष्ट्र में होने जा रहे चुनाव में पार्टी के जीतने की संभावना ही नहीं है. उन्होने कहा कि चुनाव जीतना तो दूर कांग्रेस अपना भविष्य तक तय नहीं कर सकती. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के साथ एक इंटरव्यू में सलमान खुर्शीद ने यह बात कही है. 


भारत के पूर्व विदेश मंत्री, सलमान खुर्शीद ने कहा कि न केवल आगामी राज्य विधानसभा चुनाव बल्कि कांग्रेस पार्टी की हालत ऐसे स्तर पर पहुंच गई है कि यह अपना भविष्य तक नहीं तय कर सकती है. खुर्शीद ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी से लगातार नेताओं को छोड़ने का सिलसिला जारी है और अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उससे उबरने में काफी देर लगा दी.


कांग्रेस नेता ने कहा कि न केवल आगामी राज्य विधानसभा चुनाव बल्कि कांग्रेस पार्टी की हालत ऐसे स्तर पर पहुंच गई है कि यह अपना भविष्य तक नहीं तय कर सकती है.उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ना हम सभी के लिए एक बड़ा झटका था.


खुर्शीद ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी से लगातार नेताओं को छोड़ने का सिलसिला जारी है और अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उससे उबरने में काफी देर लगा दी. खुर्शीद ने कहा- वास्तव में एक साथ इसका विश्लेषण नहीं किया कि क्यों लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. हमारी सबसे बड़ी समस्या ये है कि हमारे नेता भाग रहे हैं.


पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि राहुल गांधी पार्टी में अभी भी सबसे वफादार बने हुए हैं. यह पहला मौका है, जब कांग्रेस के किसी नेता ने राहुल गांधी के इस्तीफे के लिए ‘छोड़ जाने’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया है. खुर्शीद ने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद एक खालीपन पैदा हुआ है. यह संकट तब और बढ़ता दिखता है, जब सोनिया गांधी उनके स्थान पर अस्थायी तौर पर कमान संभाल रही हैं.


पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने राहुल गांधी के इस्तीफे को लेकर कहा कि मैं नहीं चाहता था कि राहुल गांधी इस्तीफा दें. मेरी राय थी कि वह पद पर रहें. मैं मानता हूं कि कार्यकर्या भी यही चाहते थे कि वह बने रहें और नेतृत्व करें. उन्होंने कहा कि यह एक खालीपन जैसा है. सोनिया गांधी ने दखल दिया है, लेकिन साफ संदेश है कि वह एक अस्थायी व्यवस्था के तौर पर हैं. मैं ऐसा नहीं चाहता.


बता दें कि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 542 सीटों में से सिर्फ 52 सीट ही मिल पाई थी जबकि पीएम नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने 2014 में 282 सीटें को मुकाबले 2019 में 303 सीटों पर जीत हासिल की.


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