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भू-माफ़िया निकले सपा सांसद आज़म खान, जौहर यूनिवर्सिटी के लिए क़िया मुस्लिमों और दलितों की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा

रामपुर से सांसद और सपा नेता आजम खान (Azam Khan) की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. प्रशासन ने आजम खान को भू माफिया (Land Mafia) घोषित कर दिया है. आजम पर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए मुस्लिम और दलितों की जमीनें कब्जाने के आरोप में प्रशासन ने ये कार्रवाई की है. उप जिला अधिकारी की तरफ से उनका नाम एंटी भू माफिया पोर्टल पर दर्ज करा दिया गया है.


सांसद आजम खान और उनके एक सहयोगी के खिलाफ 26 किसानों की 5 हजार हेक्टेयर जमीन हड़पकर मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्‍तेमाल करने का संगीन आरोप है. आजम के खिलाफ बीते एक हफ्ते में 13 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. जिला प्रशासन ने आजम के खिलाफ कार्रवाई की है. एसडीएम की तरफ से उनका नाम ऐंटी-भू माफिया पोर्टल में दर्ज कर लिया गया.


रामपुर जिला प्रशासन ने अजीम नगर पुलिस थाने में यूपी के राजस्व विभाग ने बीते शुक्रवार को आजम और उनके सहयोगी अलेहसन खान नाम के एक पूर्व पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके बाद उनके खिलाफ एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हो गए. अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं. पिछले कुछ समय में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं.


बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2017 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया की पहचान करने और जमीन कब्जाने से संबंधित लोगों की शिकायत दर्ज कराने के लिए इस पोर्टल की शुरुआत की थी.


मुकदमों की विवेचना के लिए बनाई SIT

रामपुर के एसपी अजय पाल शर्मा ने बताया कि आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों की विवेचना के लिए एसआईटी बनाई गई है. उन्होंने बताया तीन सदस्यीय स्पेशल आज़म खान पर दर्ज मुकदमों की विवेचना करेगी. एसपी ने बताया की जौहर यूनिवर्सिटी में जमीन कब्जे के सम्बंध में 13 मुकदमे दर्ज हुए है. इस मामले की तफ्तीश में एक इंस्पेक्टर और दो सब इंस्पेक्टर की टीम गठित की गई है. 


सपा ने भी बनाई जांच कमेटी

आजम खान पर दर्ज मुकदमों को लेकर अखिलेश यादव की 21 सदस्य जांच कमेटी बनाई है, जो 20 जुलाई को रामपुर आ रही है. इस पर कांग्रेस नेता फैसल लाला ने अखिलेश यादव को खत लिखा है. उन्होंने बताया, ‘मैंने अखिलेश यादव से ये आग्रह किया है कि आप अपने जांच दल को ये हिदायत दे कि वो उन पीड़ित परिवारों से जरूर मिले, जिनके साथ ज़ुल्म हुआ था और उनकी जमीने कब्जा कर ली गई. एक मामला जोहर यूनिवर्सिटी की जमीन का है और दूसरा यतीमखाना बस्ती का है, जहां 40 लोगों को बेघर कर जमीन पर वह काबिज हुए. 


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