Lok Sabha 2019 Politics

रेप का आरोपी गठबंधन प्रत्याशी फरार, पसोपेश में मतदाता किसे करें वोट?

लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में पहुँच चुका है. इस चरण में पूर्वांचल की घोसी संसदीय सीट पर भी वोटिंग होनी है. इस सीट पर मुकाबला भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन के बीच है. भाजपा ने इस सीट के लिए हरिनारायण राजभर को टिकट दिया है जबकि गठबंधन ने इस सीट पर अतुल राय को अपना प्रत्याशी बनाया है. प्रत्याशी घोषित होने के बाद अतुल ने इस सीट पर कुछ दिनों तक अपना चुनाव-प्रचार किया लेकिन अब वह फरार चल रहे हैं. गठबंधन प्रत्याशी राय पर रेप का आरोप है और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए वह फरार हैं जबकि पुलिस उन्हें दबोचने के लिए अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही है.


रेप मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए राय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें वहां से निराशा हाथ लगी. कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी पर स्टे देने से इनकार कर दिया. फिलहाल कहा जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए राय भूमिगत हो गए हैं. इस सीट पर भाजपा जहां आक्रामक होकर अपना चुनाव प्रचार कर रही है, वहीं गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है. गठबंधन को समझ में नहीं आ रहा है कि वह राय की कमी किस तरह से पूरी करे. गठबंधन के मतदाताओं के सामने भी उलझन है कि वह फरार चल रहे प्रत्याशी के पक्ष में वोट करें अथवा उन्हें किसी और विकल्प की तलाश करनी चाहिए.


यह है मामला

वाराणसी की एक पूर्व छात्रा ने अतुल राय पर रेप का आरोप लगाया है. छात्रा का आरोप है कि राय अपनी पत्नी से मिलाने के लिए उसे अपने घर ले गए जहां उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया. राय ने अपने लगे आरोप से इंकार किया है लेकिन गत एक मई को उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी कर दिया. बताया जा रहा है कि पुलिस से बचने के लिए राय भूमिगत हो गए हैं. इधर पुलिस उन्हें दबोचने के लिए मऊ और आस-पास के जिलों में दबिश दे रही है.


वहीं, सपा-बसपा गठबंधन का मानना है कि अतुल की गैर-मौजूदगी का असर उसके वोट बैंक पर नहीं पड़ेगा. गठबंधन इस सीट पर अपनी जीत का दावा कर रहा है. बसपा के जिला प्रभारी ललित कुमार अकेला गांव-गांव जाकर अपने वोटरों को भरोसे में ले रहे हैं. अकेला का कहना है कि अतुल कहां पर इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी का वोटरों पर कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है, क्योंकि गठबंधन का वोट पक्का है वह कहीं और नहीं जाने वाला.


बता दें कि घोसी सीट पर करीब 3.5 लाख जाटव (दलित), 2 लाख यादव (ओबीसी), 1.2 लाख राजभर (ओबीसी), एक लाख नूनिया (ओबीसी) और 80 हजार गैर-जाटव दलित वोट हैं. इस सीट पर करीब 4 लाख से ऊपर सवर्ण जातियों के वोट हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के हरिनारायण राजभर ने बसपा के दारा सिंह चौहान को हराया था. राजभर को 3,79,797 वोट और चौहान को 2,33,782 वोट मिले थे.


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