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सोशल मीडिया पर चल रही #AwesomeWithoutAllah की आंधी, बड़ी तादाद में इस्लाम छोड़ रहे हैं युवा, जानें क्या है मामला…

Awesome Without Allah trending on social media a large number of youth are leaving Islam Religion

बीते 17 सितंबर यानि की मंगलवार को उत्तरी अमेरिका की कुलसुम ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया. कुलसुम ने यूट्यूब पर इस्लाम को त्यागने का ऐलान किया. साथ ही विस्तार से बताया कि वह इस्लाम को छोड़ने के बाद कितनी शांति महसूस कर रही हैं. कुलसुम अकेली नहीं है, उनके जैसे कई ऐसे लोग है जो इस्लाम को छोड़ना चाह रहे है. इसके चलते उत्तरी अमेरिका के एक संगठन ने हैशटैग ऑसम विदआउट अल्लाह (#AwesomeWithoutAllah) को ट्रेंड करा रहें है. इसने हाल ही में अपना पहला बिलबोर्ड लगाया है. ये बिलबोर्ड ऐलान करता है कि उत्तरी अमेरिका के हर चौथे मुस्लिम ने इस्लाम को छोड़ दिया है.



वहीं, इस समय ट्विटर और सोशल मीडिया पर #AwesomeWithoutAllah की आंधी चल रही है. ये एक स्वत: स्फूर्त अभियान है. इस अभियान का न तो कोई चेहरा है और न कोई इन्हें इस बात के लिए प्रेरित कर रहा है. बता दें मसला इस्लाम है, लेकिन उससे भी बड़ा पहलू है. जब कोई धर्म, व्यवस्था, शासन पद्धति जड़ हो जाती है और समय के साथ परिवर्तनशील नहीं होती, किसी तबके या लिंग आधार पर वंचित रखती है तो वह समाप्त हो जाती है. वहाबी प्रभाव ने इस्लाम को जड़ कर दिया. यह अभियान और इस्लाम छोड़ने वालों के विचारों को यदि आप सुनेंगे, तो इसके कारणों को समझ सकेंगे.



जाने लोगों की राय…

इस अभियान में सक्रिय इस्लाम को त्यागने वाली जारा कहती हैं कि ‘मैं सभी मुस्लिम महिलाओं को कहना चाहती हूं. हम कोई सेक्स की मशीन नही हैं. हमें किसी ओछे आदमी की हरकतों के लिए खुद को कोसने की जरूरत नहीं है. अगर मर्द स्वयं को संभालने के लायक नहीं हैं, तो ये उनकी दिक्कत है. हम क्यों अपनी गर्दन और बाल हिजाब में ढकें’.



वहीं, इस्लाम से मुंह मोड़ने वाले मोहम्मद सैयद नार्थ अमेरिका में इस्लाम को छोड़ने वालों के संगठन एक्स मुस्लिम आफ नार्थ अमेरिका (ईएक्सएमएनए) के अध्यक्ष हैं. उनका कहना है कि ‘इस्लाम को छोड़ने वालों में अधिकतर वो लोग हैं, जिन्होंने इस्लाम का अध्ययन किया है’. वह इस बारे में बर्टेंड रसैल का बयान दोहराते हैं. रसैल ने कहा था कि इस्लाम का इलाज यही है कि कुरान और हदीस को कायदे से पढ़ लिया जाए. ईएक्सएमएनए ने ऑनलाइन के साथ ही ऑफलाइन अभियान भी शुरू किया है. तमाम जगह होर्डिंग लगाए गए हैं कि अमेरिका में रहने वाले हर चौथे मुस्लिम ने इस्लाम को छोड़ दिया है.


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ईएक्सएमएनए ने इसी हफ्ते भारत के 4 मुस्लिम लड़कों की तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है. ये इनमें से 2 हाथ में पेंसिल से लिखा प्लेकार्ड लिए हैं. जिस पर लिखा है ऑसम विदाउट अल्लाह. इसमें एक शख्स ने कुत्ते को गोद में लिया हुआ है और चुटकी ली है कि हम कुत्तों से भी प्यार करते हैं. गौरतलब है कि कुत्तों को लेकर इस्लाम में ऐतराज है.



स्कैंडिनेविया की नास्तारन गोदराजी ट्विटर पर एक वीडियो के साथ इस्लाम को छोड़ने का ऐलान करती हैं. वह बात ही यहां से शुरू करती हैं कि ‘इस्लाम अमानवीय और एक आदिम युग का धर्म है. मैं इस्लाम को छोड़ने का ऐलान करती हूं. लिंक पर जाकर आप इस वीडियो को देख सकते हैं’.



दरअसल, ये मसला उतना सीधा नहीं है, जितना नजर आता है. इस्लाम मजहब को छोड़ने का विकल्प नहीं देता. वहां या तो मुसलमान हैं, या फिर आप नहीं हैं. मायने ये कि इस्लाम को छोड़ने का मतलब ये है कि ऐसे शख्स की हत्या कर देना वाजिब है. दो साल के अंदर 13 लोगों की हत्या मुस्लिम मजहब छोड़ने के कारण कर दी गई. दुनिया के तमाम इस्लामिक देश इस अभियान के कारण चिंता में हैं. इसकी नींव तो साल 2010 के शुरू में ही पड़ गई थी. लेकिन साल 2019 में इस अभियान ने आंधी का रूप ले लिया है.



तलवार के दम पर दुनिया में फैलने वाले मजहब के लिए चिंता की बात ये भी है कि इस्लाम को छोड़ने वाले डर नहीं रहे हैं. वे ऑसम विदाउट अल्लाह लिखी टीशर्ट पहन रहे हैं. वे ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफॉर्म पर बता रहे हैं कि वह कितना आजाद महसूस कर रहे हैं. यानी इस्लाम छोड़ने वालों की तादाद बढ़ रही है और खौफ कम हो रहा है. इस्लामिक देशों के अखबारों में तो इस अभियान के खिलाफ बड़े-बड़े लेख छप रहे हैं. तमाम आलिम और मौलवी ऐसे लोगों की हत्या कर देने की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन डर कोई नहीं रहा. सितंबर माह में ही ब्रिटेन में पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया. ये दोनों इस्लाम छोड़ देने वाली एक लड़की की हत्या की साजिश के आरोपी हैं.


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अब तक के तमाम जिक्र को लेकर आप ये राय न बना लें कि यह सिर्फ अमेरिका या यूरोप के कुछ देशों में हो रहा है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान हो या फिर शरिया से चलने वाले सूडान या इस्लामिक क्रांति वाला ईरान. तमाम देशों में युवाओं के बीच अल्लाह में अकीदा रखना बंद कर देना चलन बन गया है. अमेरिकी जरनल द न्यू रिपब्लिक ने साल 2015 में एक अध्ययन किया था. अंग्रेजी और अरबी में नास्तिक शब्द खोजने पर विभिन्न अरब देशों के 250 पेज और ग्रुप मिले. इनमें से कई की सदस्य संख्या तो 10 हजार के पार थी. अब ऐसे पेज10 हजार से ज्यादा हैं.


आप दुनिया के सबसे रूढ़ीवादी मुल्क का नाम लीजिए तो आपको वहां अल्लाह में यकीन न रखने वालों का ग्रुप मिलेगा, मेंबर मिलेंगे, जो सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं. ये हम उन देशों की बात कर रहे हैं, जहां अल्लाह अस्तित्व को नकारने पर मौत की सजा का प्रावधान है. सऊदी अरब जैसे देश में इस्लाम और अल्लाह में यकीन न रखने वालों की संख्या 20 लाख तक पहुंच चुकी है.


इस्लाम के साथ जो हो रहा है, वह कैथोलिक चर्च के साथ हो चुका है. चर्च की रूढ़ीवादिता ने नए पंथों को जन्म दिया. कैथोलिक चर्च आज ईसाई धर्म का अकेला ठेकेदार नहीं रह गया है. इस्लाम में दिक्कत इससे भी बढ़कर है. पूरी दुनिया में कुल मुसलमानों में 80 प्रतिशत सुन्नी और 20 प्रतिशत शिया हैं. सुन्नी मुसलमानों में भी सबसे ज्यादा प्रभाव वहाबियों का है. मसलन बरेलवी सूफी परंपरा को मानते हैं, दहशतगर्दी को खारिज करते हैं. इसलिए वहाबी बरेलवियों के विरोधी हैं. अहमदिया मुसलमानों को मुसलमान मानने से ही इंकार कर दिया गया है. सऊदी अरब ने इनके हज करने पर पाबंदी लगा रखी है. पाकिस्तान में भी ये इस्लाम से खारिज हैं. इस्लाम हर खुलने वाली खिड़की को बंद कर देता है.


आपको बता दें हर नए विचार, हर प्रगतिशील सोच को इस्लाम में जगह नहीं मिलती. औरंगजेब के कट्टरपंथ ने ही मुगलों के पतन की शुरुआत की थी. इसी कट्टरपंथ, दहशतगर्दी, आदिम युगीन व्यवस्था के खिलाफ दुनिया में एक बयार चल पड़ी है. ये ऐसी सुनामी बन सकती है कि इस्लाम का रूप ही बदल जाए.


Also Read: सऊदी अरब में बगावत पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं, छोड़ रहीं बुर्का पहनना


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