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इस करवाचौथ पर करें चन्द्रमा के साथ गणपति जी की पूजा, हर मनोकामना होगी पूरी

आज देशभर में महिलाएं करवाचौथ का व्रत कर रही हैं. करवाचौथ महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है. इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और भगवान से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है. इस बार ये त्योहार आज यानि शनिवार, 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. करवाचौथ का व्रत रखने वाली विवाहित महिलाएं इस बात का ध्यान रखें कि चंद्रमा के दिखने पर ही अर्घ्य प्रदान करना चाहिए. इसके साथ ही भगवान गणेश और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य देना चाहिए.

 

करवाचौथ के व्रत के बारे में महान संत कवि तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड की इन महत्वपूर्ण पंक्तियों में पति-पत्नी के पावन संबंधों की सार्थक व्याख्या की है. सीता जी वन जा रहे भगवान राम से कहती हैं कि, माता, पिता, बहन, प्यारा भाई, प्यारा परिवार, मित्रों का समुदाय, सास,ससुर, गुरु, स्वजन, सहायक और सुंदर सुशील और सुख देने वाला पुत्र, हे नाथ! जहां तक स्नेह और नाते हैं, पति के बिना स्त्री को सभी सूर्य से बढ़ कर तपाने वाले हैं. शरीर, धन, घर, पृथ्वी, नगर और राज्य, पति के बिना स्त्री के लिए यह सब शोक का समाज है.

 

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करवा चौथ का व्रत गृहस्थ जीवन के लिए इसीलिए अति महत्वपूर्ण हैं. सावित्री ने इस बात की गंभीरता को समझा, तभी तो तप कर पति सत्यवान के लिए यमराज से लंबी आयु का वरदान हासिल किया. यह व्रत ज्यादातर महिलाएं ही करती हैं. विवाहित महिलाएं इस दिन पूरा सिंगार कर, आभूषण आदि पहन कर शिव, शिवा, गणेश, मंगल ग्रह के स्वामी देव सेनापति कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा करती हैं. विवाहित महिलाएं पकवान से भरे दस करवे- मिट्टी के बने बर्तन, गणेश जी के सम्मुख रखते हुए मन ही मन प्रार्थना करें- ‘करुणासिन्धु कपर्दिगणेश! आप मुझ पर प्रसन्न हों.’

 

बता दें कि करवे में रखे लड्डू पति के माता-पिता जी को वस्त्र, धन आदि के साथ जरूर देना चाहिए और करवे पूजा के बाद विवाहित महिलाओं को ही बांट देने चाहिए. निराहार रह कर दिन भर गणेश मंत्र का जाप करना चाहिए. वहीं रात्रि में चंद्रमा के दिखने पर ही अर्घ्य प्रदान करना चाहिए. इसके साथ ही गणेश और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य देना चाहिए. यहां ध्यान रखना है कि व्रत करने वाले केवल मीठा भोजन करना चाहिए. व्रत को कम से कम 12 या 16 साल तक करना चाहिए. इसके बाद उद्यापन कर सकते हैं.

 

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