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कलयुग के द्रोणाचार्य हैं उत्तराखंड के शिक्षक आशीष डंगवाल, जिनके तबादले पर स्कूली बच्चों के साथ रो पड़ा पूरा गांव

एक ऐसा दृश्य जिसमें एक व्यक्ति के जाने पर गांव का हर बच्चा, जवान, बूढ़ा और महिलाएं गले मिलकर फूट-फूटकर रो रहे है. सबकी आंखों में आंसुओं की अविरल धारा बह रही है. ये दृश्य है उत्तराखंड (Uttrakhand) के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले के राजकीय इंटर केलसू घाटी में तैनात शिक्षक आशीष डंगवाल (Ashish Dangwal) के विदाई की. जहां इस शिक्षक का तबादला होंने पर उनके यहाँ से चले जाने का दु:ख ग्रामीण लोगों को है. स्कूली बच्चों के साथ पूरा गांव फूल माला और ढोल-दमाऊं के संग शिक्षक आशीष को कभी न भूलने वाली विदाई दी. ग्रामीण लोगों ने कहा कि ‘आशीष डंगवाल नें गुरु द्रोणाचार्य की नयी परिभाषा गढ़ डाली है. जो शिक्षा महकमे सहित अन्य सरकारी सेवकों के लिए नजीर है’.


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दरअसल, उत्तराखंड के जिले उत्तरकाशी के राजकीय इंटर केलसू घाटी के शिक्षक आशीष डंगवाल की विदाई पर ग्रामीणों ने उनको जमकर सराहना की. ग्रामीणों ने बताया कि ‘आज लोग दुर्गम स्थानों पर नौकरी नहीं करना चाहते है तो वहीं गुरू द्रोण आशीष डंगवाल नें दुर्गम को अपनी कर्मस्थली बना डाला. उन्होंने एक मिशाल पेश की है. अन्यत्र तबादला होने के बाद आज उनके विदाई समारोह में पूरी केलसू घाटी के गांवों के ग्रामीण और स्कूल के बच्चे उनके विदाई समारोह में फूट-फूटकर रो रहे है. हर किसी की आंखों के आंसुओं को देखकर लग रहा था कि शायद ही अब उन्हें आशीष डंगवाल जैसे शिक्षक मिल पाये’.


जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

बता दें आशीष डंगवाल पिछले 3 सालों से उत्तरकाशी जिले के केलसु घाटी में स्थित एक सरकारी स्कूल में छात्र-छात्राओं को शिक्षा दे रहे हैं. उत्तराखंड के शिक्षा के हालात इतने अच्छे नहीं है. यहां के स्कूलों में पढ़ने के लिए छात्रों और शिक्षकों को काफी संघर्षों का सामना करना पड़ता है. पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी शिक्षक जाने से कतराते हैं, ऐसे में सिर्फ वहीं के बच्चे शिक्षक और उनकी दी हुई शिक्षा की कीमत बखूबी जानते हैं. आशीष के सम्मान में जब विदाई समारोह शुरू हुआ तो समारोह में उन्हें ढोल बजाकर विदाई दी गई. स्कूल के बच्चे, उनके मांता-पिता और आसपास के गांव वाले भी आशीष से मिलने आए.


जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

इस दौरान सिर्फ बच्चे ही नहीं उनके मां-बाप भी शिक्षक से लिपटकर रोने लगे. आशीष के जाने पर गांव वालों और छात्रों का दु:ख ये साफ दिखाता है कि उनका स्वभाव कितना मिलनसार होगा. उन्होंने कितना प्यार और सम्मान कमाया होगा. बच्चे रो-रोकर एक ही बात बोल रहे थे कि गुरुजी आप ना जाओ. वहीं, आशीष ने कहा कि ‘यह गांव मेरा दूसरा घर है. मैं जल्द ही वापिस आऊंगा’.


जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

गांववालों का कहना था कि ‘आशीष काफी मिलनसार स्वभाव के थे. जब भी उनकी छुट्टी होती वह खेतों में आकर काम करते थे और खेती के बारे में जानकारी देते थे. जब भी हमें कोई दिक्कत होती थी वह हमेशा मेरी मदद करते थे’. लोग उन्हें एक शिक्षक नहीं बल्कि अपना बेटा मानते थे. उनका कहना जहां आशीष बच्चों को पढ़ाते थे, वहीं घर-घर जाकर उनके माता-पिता को शिक्षा का महत्व भी बताते थे.


जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

इस अवसर पर शिक्षक आशीष डंगवाल नें एक मार्मिक फेसबुक पोस्ट भी शेयर की है. उन्होंने विदाई समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा है… ‘मेरी प्यारी केलसु घाटी, आपके प्यार, आपके लगाव, आपके सम्मान, आपके अपनेपन के आगे मेरे हर एक शब्द फीके हैं. सरकारी आदेश के सामने मेरी मजबूरी थी, मुझे यहां से जाना पड़ा और मुझे इस बात का बहुत दु:ख है. आपके साथ बिताए 3 वर्ष मेरे लिए अविस्मरणीय हैं. भंकोली, नौगांव, अगोडा, दंदालका, शेकू, गजोली, ढासड़ा के समस्त माताओं, बहनों, बुजुर्गों, युवाओं ने जो स्नेह बीते वर्षों में मुझे दिया है, मैं जन्म-जन्मांतर के लिए आपका ऋणी हो गया हूँ. मेरे पास आपको देने के लिये कुछ नहीं है. लेकिन, एक वादा है आपसे कि केलसु घाटी हमेशा के लिए अब मेरा दूसरा घर रहेगा. आपका ये बेटा लौट कर आएगा, आप सब लोगों का तहेदिल से शुक्रिया. मेरे प्यारे बच्चों हमेशा मुस्कुराते रहना. आप लोगों की बहुत याद आएगी.


जब टीचर ने ली विदाई, तो रो पड़ा स्कूल का हर बच्चा, देखें-PHOTOS

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