मिलिए उन दलितों से जो संभालते हैं CM योगी के ‘गोरखनाथ मंदिर’ की पूरी व्यवस्था

देश के कुछ मंदिरों में दलितों के प्रवेश न देने की ख़बरें आ चुकी हैं, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ. इतिहास गवाह है कि देश में  दलितों का उत्पीड़न हुआ. छुआछूत से लेकर पूजा-पाठ में भी उनके साथ भेदभाव किया गया. जिस समय मंदिरों में प्रवेश की बात तो दूर की बात यहाँ तक कि मंदिरों में दलितों की छाया भी पड़ना गुनाह माना जाता था उसी दौरान देश के एक प्रसिद्ध मंदिर और उसके महंत ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, वो मंदिर कोई और नहीं गोरखनाथ मंदिर था और महंत अवैद्यनाथ थे.

 

गोरखनाथ मंदिर कल ही नहीं आज भी जातिवाद की लड़ाई लड़ रहा है. आपको जानकार आश्चर्य होगा कि वर्तमान समय में मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ स्वयं अनुसूचित जाति से आते हैं. यहाँ पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में अनुसूचित जाति के लोगों का अहम योगदान है. गौशाला के प्रभारी परदेशी राम मंदिर के रसोइया से लेकर मीडिया प्रभारी विनय गौतम भी अनुसूचित जाति से ही आते हैं. अगर सरल भाषा में समझें तो अनुसूचित जाति का व्यक्ति ही मंदिर भगवान को पूजता है. अनुसूचित जाति के व्यक्ति के हाथ से बना प्रसाद और भोजन इत्यादि ही सभी जाति के लोग खाते हैं. यहाँ तक कि खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रसोइयाँ तक अनुसूचित जाति से आता है.

 

गोरखनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश पर प्रधान पुजारी योगी कमल नाथ ने बताया कि यहाँ जात-पात को लेकर कोई भेदभाव नहीं है. सभी जाति और धर्मो के लोग दर्शन करने आते हैं. किसी को उनकी जाति पूछकर मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता. बीते 42 सालों से मंदिर की सेवा कर रहा हूं, वहीं अनुसूचित जाति का होने के बावजूद कभी भी मंदिर के अंदर मुझे अहसास नहीं हुआ. हमेशा सभी जातियों की तरह यहां पर सभी को बराबर सम्मान मिलता है. देश के मंदिरों में अनुसूचित जाति के लोगों को प्रवेश देने के सवाल पर कमल नाथ कहते हैं कि ये पूरी तरह से विरोधियों की साजिश है. जो देश को जाति के अधार पर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं.

 

इसी कड़ी में गोरखनाथ मंदिर में स्थित गौशाला के प्रभारी परदेशी राम बताते हैं कि कई साल से मंदिर की सेवा करते हो गए. वहीं मंदिर के अंदर अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के अधिकांश कर्मचारी काम कर रहे है, लेकिन भेदभाव कभी देखने को नहीं मिला. परदेशी राम ने बताया कि महाराज जी (सीएम योगी आदित्यनाथ) के मुख्य रसोइया से लेकर बाकी कर्मचारी अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के है.

 

दलित समाज से जुड़े विनय गौतम गोरखनाथ पीठ के फोटोग्राफर जर्नलिस्ट हैं. विनय वर्ष 2007 से इस पीठ और योगी आदित्यनाथ की सेवा में लगे हुए हैं. विनय ने बताया कि देवीपाटन मंदिर के महंत मिथलेश नाथ दलित हैं. जो इसी नाथ पीठ से जुड़े हुए है. उन्होंने बताया कि मंदिर के अंदर कभी भी धर्म का श्रदालु दर्शन कर सकता है. ऐसे में यह कहा जा सकता है की गोरक्षनाथ मंदिर में दलित ही नहीं बल्कि सर्व समाज के लोगों के लिए हमेशा खुला रहा है.

 

बता दें कि गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ ने जातिवाद की  काफी लम्बी लड़ाई लड़ी है. जातिवाद को खत्म करने के लिए वो राजनीति में आये थे. अवैद्यनाथ 4 बार विधायक और 4-4 बार सांसद रहे लेकिन हमेशा सामाजिक कुरीतियो को दूर करने और सामाजिक समरसता कायम रखने के लिये प्रयास करते रहे. जातिवाद के प्रति महंत अवैद्यनाथ की लड़ाई का ही नतीजा है कि आज की तारीख में भी गोरखनाथ मंदिर भेदभाव या छुआछूत से कोसों दूर हैं.

 

वहीं महंत अवैद्यनाथ के शिष्य और उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी उन्ही के क़दमों पर चल रहे हैं. सरकार बनाने के बाद सीएम योगी ने सबसे पहले गोरखपुर पहुंचकर 102 अनुसूचित जाति के लोगों के साथ जमीन पर सामूहिक भोजन किया था. सांसद रहते हुए योगी ने सड़क से संसद तक इनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी. इन्हें नागरिक अधिकार देने का मामला संसद में उठाया. ज्यादातर वनटांगिया दलित और पिछड़े वर्ग से हैं. योगी 11 साल से उन्हीं के साथ दीपावली मनाते हैं.

 

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