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समलैंगिगता पर निर्णय के बाद वसीम रिजवी बोले ‘कट्टरपंथी मौलानाओं को सबसे ज्यादा राहत’

 

शिया वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं इस बार उन्होंने लेस्बियन और होमोसेक्स को लेकर मदरसों के मौलानाओं पर निशाना साधा है. लखनऊ में गुरुवार को एक वीडियो जारी करते हुए वसीम रिजवी ने कहा कि आज होमोसेक्स और लेस्बियन को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबसे ज्यादा राहत कट्टरपंथी मौलानाओ को होगा.

 

वसीम रिजवी ने कहा कि होमोसेक्स और लेस्बियन सेक्स की इस्लाम में सख्त मनाही है. फिर भी इस्लाम की तालीम देने वाले कट्टरपंथी मदरसों में मौलाना होमो सेक्स की क्रिया में लिप्त रहते हैं. आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा होमो सेक्स और लेस्बियन सेक्स को मान्यता देने के बाद हम समझते हैं सबसे बड़ी राहत कट्टरपंथी मदरसों के मुल्लाओं को मिली है. क्योंकि शरई तौर पर ये सेक्स तो हराम है. लेकिन शरियत का कानून इस मामले में हिंदुस्तान में लागू नहीं होता. लेकिन संविधान के तहत बनाए गए कानून में पहले ये अपराध था, लेकिन अब यह नहीं है. होमो सेक्स मामले में कानूनी दुश्वारियां अब इन मुल्लाओं के लिए समाप्त हो चुकी हैं.

 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आपसी सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा भी शामिल थे. अदालत ने इस मामले में फैसला 17 जुलाई को ही सुरक्षित रख लिया था.

 

बता दें यह पहला मौका नहीं है जब वसीम रिजवी ने मदरसों को लेकर विवादित बयान दिया है. इससे पहले भी वे मदरसों में आतंकी तालीम की बात उठा चुके हैं. हाल ही में अयोध्या की विवादित जमीन राम मंदिर के लिए देने के उनके प्रस्ताव पर उनके खिलाफ इराक से फतवा भी आया था. जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया. जिसके बाद उन्हें इस्लाम से खारिज भी कर दिया गया.

 

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